सरकारी स्कूल की पढ़ाई काफी नहीं? तो फिर क्या करें? एक गाँव ने ढूँढ़ लिया है जवाब।
हल्द्वानी के गोलापार का वो गाँव, जहाँ शिक्षा की लौ जलाने का संकल्प कोई अकेले पूरा कर रहा है
कल्पना कीजिए एक ऐसे गाँव की, जहाँ स्कूल तो हैं,परन्तु संसाधन और सही मार्गदर्शन नहीं। जहाँ बच्चे स्कूल से लौटते हैं, लेकिन उनके सवालों के जवाब घर पर कोई नहीं दे पाता। ऐसा ही एक गाँव है उत्तराखंड के हल्द्वानी के पास गोलापार क्षेत्र का दौलतपुर।
और अब इस गाँव की तस्वीर बदल रही है। इस बदलाव का नाम है प्रकाश सिंह बिष्ट और उनकी संस्था ‘देवभूमि जन सेवा संस्था’।
करीब 9 – 10 साल की सेवा, 2 साल का विशेष संकल्प जिसका नाम है ‘बाल संस्कार केंद्र’
प्रकाश जी पिछले 9-10 साल से सामाजिक सेवा में जुटे हैं। लेकिन पिछले 2 साल से उन्होंने एक ऐसा मिशन शुरू किया है, जो सीधे गाँव के भविष्य—यानी बच्चों—से जुड़ा है। उन्होंने देखा कि कैसे वित्तीय तंगी या पारिवारिक परिस्थितियों के चलते बच्चे और बालिकाएँ, पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं या सही मार्गदर्शन न मिलने से अपनी प्रतिभा को पूरी तरह नहीं निखार पाते।

इन्हीं बच्चों के लिए प्रकाश जी और उनकी टीम ने शुरू किया एक निःशुल्क ‘आफ्टर स्कूल’ क्लास का अभिनय प्रयोग। ये बच्चे दिन में सरकारी स्कूल जाते हैं, लेकिन शाम को इस क्लास में आकर अपनी पढ़ाई को मजबूत करते हैं, गृहकार्य पूरा करते हैं और सबसे बढ़कर, एक सही दिशा पाते हैं।
सिर्फ पढ़ाना नहीं, मार्गदर्शन देना है लक्ष्य
इस ‘आफ्टर स्कूल’ क्लास की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ पढ़ाई नहीं होती। यहाँ आईएएस, आईपीएस की तैयारी कर रहे युवा और अन्य पढ़े-लिखे स्वयंसेवक बच्चों को पढ़ाते हैं। ये शिक्षक न सिर्फ किताबी ज्ञान देते हैं, बल्कि एक रोल मॉडल बनकर उन्हें जीवन का लक्ष्य दिखाते हैं, उनका हौसला बढ़ाते हैं। सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों से सभी वाकिफ हैं, और यह पहल उन चुनौतियों को पूरक बनाने का काम कर रही है।

एक पुस्तकालय का सपना: युवाओं के लिए ज्ञान का द्वार
प्रकाश जी का अगला विजन और भी बड़ा है। वे गाँव में एक पुस्तकालय (लाइब्रेरी) स्थापित करना चाहते हैं। ऐसा पुस्तकालय जो गाँव के सभी युवाओं के लिए ज्ञान का भंडार बने। जहाँ वे युवा जो आगे पढ़ना चाहते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में रुक जाते हैं, उन्हें सब कुछ मिल सके। यह पुस्तकालय सिर्फ किताबों का घर नहीं, बल्कि सपनों को उड़ान देने का रनवे बनेगा।
महिलाओं के लिए स्वरोजगार
अब तक उनका फोकस बालिकाओं पर था, अब वे सभी बच्चों को निःशुल्क ‘आफ्टर स्कूल’सेवा देना चाहते हैं। साथ ही, उनकी संस्था ने महिला स्वरोजगार समूह भी बनाए हैं, जिनके जरिए कई महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। यानी, यह मिशन सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र समुदाय विकास की ओर अग्रसर है।




आप भी बन सकते हैं इस बदलाव का हिस्सा
प्रकाश सिंह बिष्ट और बाल विकास केंद्र का यह सफर अकेले चलने वाला नहीं है। यह तभी सफल होगा जब समाज के हर सदस्य का सहयोग मिलेगा।
आप कैसे योगदान दे सकते हैं?
· अपना कीमती समय दें: यदि आप पढ़े-लिखे हैं और शिक्षा से जुड़े हैं, तो स्वयंसेवक बनकर इन बच्चों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
· ज्ञान दान करें: अपनी पुरानी शैक्षणिक किताबें, प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री या कोई भी ज्ञानवर्धक सामग्री दान करके पुस्तकालय के सपने को साकार करने में मदद कर सकते हैं।
· वित्तीय सहयोग: इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए आप आर्थिक रूप से भी सहयोग कर सकते हैं।

एक बच्चे की जिंदगी में शिक्षा की रोशनी भरना, पूरे समाज को रोशन करने जैसा है। आइए, मिलकर दौलतपुर और ऐसे ही गाँवों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएँ।